नसबंदी पर कमलनाथ सरकार का यू-टर्न, अब अफसरों के लिए नहीं है कोई टारगेट

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परिवार नियोजन कार्यक्रम में पुरुषों की भागीदारी बढ़ाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने एक आदेश जारी किया था। जिसे विवाद बढ़ने पर वापस ले लिया गया है। सरकार ने आदेश में हेल्थ वर्कर्स से कहा था कि वह कम से कम एक व्यक्ति की नसबंदी कराएं। अगर वह नहीं करते तो उनको जबरदस्ती वीआरएस दे दिया जाएगा और सैलरी में भी कटौती की जाएगी।

शिवराज सिंह चौहान ने उठाए सवाल

इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आदेश को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने ट्वीट कर लिखा है कि मध्यप्रदेश में अघोषित आपातकाल है। क्या ये कांग्रेस का इमर्जेंसी पार्ट-2 है? एमपीएचडब्ल्यू के प्रयास में कमी हो तो सरकार कार्रवाई करे, लेकिन लक्ष्य पूरे नहीं होने पर वेतन रोकना और सेवानिवृत्त करने का निर्णय तानाशाही है।

ये आदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (National Health Mission) ने राज्य के हेल्थ वर्कर्स को जारी किया था। आदेश में कहा गया कि जो नसबंदी का टारगेट पूरा नहीं करेगा उसे सेवा से मुक्त कर दिया जाएगा। बता दें पिछले पांच सालों में राज्य में नसंबदी के लिए पुरुषों की संख्या घटी है।

2019-20 में 3.39 लाख महिलाओं ने और 20 फरवरी तक सिर्फ 3,397 पुरुषों ने नसबंदी कराई। 2015-16 में 9,957, 2016-17 में 7,270, 2017-18 में 3,719 और 2018-19 में 2,925 पुरुषों ने नसबंदी कराई थी।