धर्म

नवंबर 2020 : इस माह के त्यौहार, पर्व और शुभ मुहूर्त

कोरोना संक्रमण के चलते 2020 के अधिकांश त्यौहारों को लोग पूर्व की भांति नहीं मना सके हैं। ऐसे में अक्टूबर 2020 में आई कोरोना में गिरावट के चलते अब नवंबर 2020 में आने वाले त्यौहारों को लेकर लोगों के मन में काफी उत्साह है। वहीं सरकार द्वारा अनलॉक की प्रक्रिया के चलते भी आमजन खुश है। ऐसे में माना जा रहा है नवंबर में आने वाले त्यौहारों को भले ही पूर्व की भांति न सही लेकिन 2020 में मनाए गए अन्य त्योहारों की अपेक्षा अीधक धूमधाम से मनाया जा सकेगा।

दरअसल नवंबर 2020 में हिंदुओं के प्रमुख त्यौहारों में से एक पांच दिवसीय पर्व दीपावली इसी माह यानि नवंबर 2020 में है। ऐसे में बाजारों में कुछ हद तक रौनक का लौटना तय माना जा रहा है। इस नवंबर जहां त्योहारों की शुरुआत 4 नवंबर, बुधवार को करवा चौथ से होगी वहीं नवंबर 2020 में आखरी पर्व छठ पूजा का होगा।

जानें नवंबर 2020 में कब पड़ेगा कौन सा त्यौहार…

:- 04 नवंबर बुधवार : करवा चौथ
– करवा चौथ हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है। यह पर्व मुख्य रूप से भारत के पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान में मनाया जाता है। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस बार ये व्रत 4 नवंबर, 2020 (बुधवार) को पड़ रहा है। इस वर्ष यानि 2020 में ये व्रत इसलिए भी खास है क्योंकि इस बार यह व्रत बुधवार को पड़ रहा है, और बुध के कारक देवता श्री गणेश जी माने जाते हैं। वहीं इस व्रत मेंं भी श्री गणेश का विशेष महत्व माना गया है।

इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत करती हैं, और शाम को चांद का दीदार करके अर्घ्‍य अर्पित करने के बाद पति के हाथ से पानी पीकर महिलाएं अपना व्रत तोड़ती हैं। इस दिन चतुर्थी माता और गणेशजी की भी पूजा की जाती है। यह पर्व मुख्य रूप से सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियां मनाती हैं। यह व्रत सुबह सूर्योदय से पहले करीब 4 बजे के बाद शुरू होकर रात में चंद्रमा दर्शन के बाद संपूर्ण होता है।

करवा चौथ 2020 के मुहूर्त… Karva Chauth 2020 Muhurta
करवा चौथ पूजा मुहूर्त :17:33:28 से 18:39:14 तक
अवधि :1 घंटे 5 मिनट
करवा चौथ चंद्रोदय समय :20:11:59

:- 05 दिवसीय दीपावली पर्व…
हर साल दीपावली के समय मनाया जाने वाले 5 दिवसीय दीपोत्सव इस साल पांच दिन के स्थान पर 4 दिन का रहेगा। क्योंकि 13 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 18 मिनट तक चतुर्दशी रहेगी। इसके बाद अमावस्या प्रारंभ होगी। अमावस्या 15 नवंबर को सुबह 10 बजकर 37 मिनट तक रहेगी, इसलिए 14 नवंबर को सुबह रूप चौदस (छोटी दीपावली) मनाई जाएगी जबकि शाम को महालक्ष्मी पूजन के साथ दीपावली मनाई जाएगी।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इस साल दीपोत्सव 13 नवंबर से प्रारंभ होकर 16 नवंबर को भाईदूज के साथ समाप्त हो जाएगा। इस हिसाब से इस साल 4 दिन का दीपोत्सव रहेगा। सामान्यतः दीप पर्व कालीन तिथियों में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जिस दिन सूर्यास्त के बाद एक घड़ी अधिक तक अमावस्या तिथि रहे उस दिन दीपावली मनाई जाती है।

द्वितीय तिथि का क्षय…
इस साल पंचांग गणना में द्वितीय तिथि का क्षय हो रहा है। इसके कारण रूप चौदस सुबह मनाई जाएगी जबकि शाम को दीपावली का पर्व मनाया जाएगा। इससे पूर्व भी द्वितीय तिथि का क्षय होने के कारण दीपोत्सव मनाए जाते रहे हैं। 13 नवंबर को प्रदोषकाल में धनतेरस एवं दीपदान शिवरात्रि का प्रदोष पर्व के साथ धन्वंतरि जयंती भी मनाई जाएगी। नरक चौदस यानि रूप चौदस चतुर्दशी का पर्व अरूणोदयम से पूर्व मनाया जाएगा। 14 नवंबर को महालक्ष्मी पूजन के समय स्वाति नक्षत्र और सौभाग्य योग रहेगा।

:- 13 नवंबर शुक्रवार : धनतेरस
– धनतेरस कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाने वाला त्यौहार है। यह 5 दिवसीय दीपावली पर्व का हिस्सा है। धन तेरस को धन त्रयोदशी व धन्वंतरि जंयती के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के जनक धन्वंतरि देव समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए धन तेरस को धन्वंतरि जयंती भी कहा जाता है। धन्वंतरि देव जब समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे उस समय उनके हाथ में अमृत से भरा कलश था। इसी वजह से धन तेरस के दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है। धनतेरस पर्व से ही दीपावली की शुरुआत हो जाती है।

इस वर्ष ये त्योहार 13 नवंबर, 2020 (शुक्रवार) को मनाया जाएगा।

धन तेरस के नियम…
1. धनतेरस कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की उदयव्यापिनी त्रयोदशी को मनाई जाती है। यहां उदयव्यापिनी त्रयोदशी से मतलब है कि, अगर त्रयोदशी तिथि सूर्य उदय के साथ शुरू होती है, तो धनतेरस मनाई जानी चाहिए।
2. धन तेरस के दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त) में यमराज को दीपदान भी किया जाता है। अगर दोनों दिन त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल का स्पर्श करती है अथवा नहीं करती है तो दोनों स्थिति में दीपदान दूसरे दिन किया जाता है।

धनतेरस 2020 मुहूर्त… Dhanteras 2020 Muhurta
धनतेरस मुहूर्त :17:34:00 से 18:01:28 तक
अवधि :0 घंटे 27 मिनट
प्रदोष काल :17:28:10 से 20:07:11 तक
वृषभ काल :17:34:00 से 19:29:51 तक

:- 14 नवंबर शनिवार : दिवाली , नरक चतुर्दशी : एक ही दिन है नरक चतुर्दशी और दिवाली…
इस साल 2020 में 14 नवंबर शनिवार को नरक चतुर्दशी व दिवाली यानि एक ही दिन मनाई जाएंगी। दरअसल सामान्यत: नरक चतुर्दशी कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आती है और दीवाली अमावस्या को लेकिन इस बार दोनों एक ही दिन है. यानि 14 नवंबर को ही छोटी और बड़ी दीवाली मनाई जाएगी। इस बार 14 नवंबर को दोपहर 2.18 बजे तक चतुर्दशी है और फिर अमावस्या शुरु हो जाएगी। दोपहर 2.19 मिनट से अगले दिन यानि कि 15 नवंबर को सुबह 10.36 बजे तक ही रहेगी। इसीलिए दीवाली और नरक चतुर्दशी दोनों एक ही दिन होंगी।

नरक चतुर्दशी कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाने वाला एक त्यौहार है। इसे नरक चौदस, रूप चौदस और रूप चतुर्दशी भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा का विधान है। दीपावाली से ठीक एक दिन पहले मनाये जाने की वजह से नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली भी कहा जाता है। नरक चतुर्दशी के दिन शाम के समय दीये जलाए जाते हैं। इस दिन यमराज की पूजा कर अकाल मृत्यु से मुक्ति और बेहतर स्वास्थ्य की कामना की जाती है। इसके अलावा नरक चौदस के दिन प्रात: काल सूर्य उदय से पहले शरीर पर तिल्ली का तेल मलकर और अपामार्ग (चिचड़ी) की पत्तियां पानी में डालकर स्नान करने से नरक के भय से मुक्ति मिलती है और मनुष्य को स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

नरक चतुर्दशी 2020 का मुहूर्त… narak chaturdashi / roop chodas 2020 muhurat
अभ्यंग स्नान समय :05:22:59 से 06:43:18 तक
अवधि :1 घंटे 20 मिनट

कार्तिक मास में अमावस्या के दिन प्रदोष काल होने पर दीपावली (महालक्ष्मी पूजन) मनाने का विधान है। यदि दो दिन तक अमावस्या तिथि प्रदोष काल का स्पर्श न करे तो दूसरे दिन दिवाली मनाने का विधान है। यह मत सबसे ज्यादा प्रचलित और मान्य है।
वहीं, एक अन्य मत के अनुसार, अगर दो दिन तक अमावस्या तिथि, प्रदोष काल में नहीं आती है, तो ऐसी स्थिति में पहले दिन दिवाली मनाई जानी चाहिए।
इसके अलावा यदि अमावस्या तिथि का विलोपन हो जाए, यानी कि अगर अमावस्या तिथि ही न पड़े और चतुर्दशी के बाद सीधे प्रतिपदा आरम्भ हो जाए, तो ऐसे में पहले दिन चतुर्दशी तिथि को ही दिवाली मनाने का विधान है।

दिवाली 2020 पर लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त… Diwali 2020 Muhurta …
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त्त :17:30:04 से 19:25:54 तक
अवधि :1 घंटे 55 मिनट
प्रदोष काल :17:27:41 से 20:06:58 तक
वृषभ काल :17:30:04 से 19:25:54 तक

दिवाली 2020 महानिशीथ काल मुहूर्त…
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त्त :23:39:20 से 24:32:26 तक
अवधि :0 घंटे 53 मिनट
महानिशीथ काल :23:39:20 से 24:32:26 तक
सिंह काल :24:01:35 से 26:19:15 तक

दिवाली 2020 शुभ चौघड़िया मुहूर्त…
अपराह्न मुहूर्त्त (लाभ, अमृत):14:20:25 से 16:07:08 तक
सायंकाल मुहूर्त्त (लाभ):17:27:41 से 19:07:14 तक
रात्रि मुहूर्त्त (शुभ, अमृत, चल):20:46:47 से 25:45:26 तक
उषाकाल मुहूर्त्त (लाभ):29:04:32 से 30:44:04 तक

दिवाली पर ये करें –
1. कार्तिक अमावस्या यानि दीपावली के दिन प्रात:काल शरीर पर तेल की मालिश के बाद स्नान करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से धन की हानि नहीं होती है।
2. दिवाली के दिन वृद्धजन और बच्चों को छोड़कर् अन्य व्यक्तियों को भोजन नहीं करना चाहिए। शाम को महालक्ष्मी पूजन के बाद ही भोजन ग्रहण करें।
3. दीपावली पर पूर्वजों का पूजन करें और धूप व भोग अर्पित करें। प्रदोष काल के समय हाथ में उल्का धारण कर पितरों को मार्ग दिखाएं। यहां उल्का से तात्पर्य है कि दीपक जलाकर या अन्य माध्यम से अग्नि की रोशनी में पितरों को मार्ग दिखायें। ऐसा करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
4. दिवाली से पहले मध्य रात्रि को स्त्री-पुरुषों को गीत, भजन और घर में उत्सव मनाना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा करने से घर में व्याप्त दरिद्रता दूर होती है।

:- 15 नवंबर, रविवार : गोवर्धन पूजा
हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा का विशेष महत्व है। इस पर्व का सीधा संबंध प्रकृति और मानव से है। गोवर्धन पूजा या अन्न कूट का त्यौहार हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा यानि दिवाली के दूसरे दिन मनाया जाता है। यह त्यौहार समस्त भारत में मनाया जाता है लेकिन उत्तर भारत में खासकर ब्रज भूमि (मथुरा, वृंदावन, नंदगांव, गोकुल, बरसाना आदि) पर इसकी भव्यता और बढ़ जाती है, जहां स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने गोकुल के लोगों को गोवर्धन पूजा के लिए प्रेरित किया था और देवराज इंद्र के अहंकार का नाश किया था।

इस बार यानि 2020 में यह पर्व 15 नवंबर, 2020 (रविवार) को मनाया जाएगा।

गोवर्धन पूजा 2020 मुहूर्त… Govardhan Puja 2020 Muhurta
गोवर्धन पूजा सायंकाल मुहूर्त :15:18:37 से 17:27:15 तक
अवधि :2 घंटे 8 मिनट

गोवर्धन पूजा की तिथि और नियम…
गोवर्धन पूजा कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाई जाती है। इसकी गणना निम्न प्रकार से की जा सकती है।

: गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन मनानी चाहिए लेकिन यह सुनिश्चित हो कि इस दिन संध्या के समय चंद्र दर्शन नहीं हो।
: यदि शाम को सूर्यास्त के समय कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन चंद्र दर्शन होने वाला है तो गोवर्धन पूजा पहले दिन करनी चाहिए।
: यदि सूर्य उदय के समय प्रतिपदा तिथि लगती है और चंद्र दर्शन नहीं हो, तो उसी दिन गोवर्धन पूजा मनानी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हो तो गोवर्धन पूजा पहले दिन मान्य होगी।
: जब सूर्योदय के बाद प्रतिपदा तिथि कम से कम 9 मुहूर्त तक विद्यमान हो, भले ही उस दिन चंद्र दर्शन शाम को हो जाए लेकिन स्थूल चंद्र दर्शन का अभाव माना जाए। ऐसी स्थिति में गोवर्धन पूजा उसी दिन मनानी चाहिए।

:- 16 नवंबर, सोमवार : भाई दूज
रक्षाबंधन पर्व के समान भाई दूज पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है। भाई दूज का पर्व भाई बहन के रिश्ते पर आधारित पर्व है, भाई दूज दीपावली के दो दिन बाद आता है, जो भाई के प्रति बहन के अगाध प्रेम और स्नेह को अभिव्यक्त करता है। इस दिन बहनें अपने भाईयों की खुशहाली के लिए कामना करती हैं।
इस बार ये पर्व 16 नवंबर, 2020 (सोमवार) को मनाया जाएगा।

भाई दूज 2020 का मुहूर्त… Bhai Dooj 2020 Muhurt
भाई दूज तिलक का समय :13:10:03 से 15:18:27 तक
अवधि : 02 घंटे 8 मिनट

भाई दूज (यम द्वितीया) कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाई जाती है। इसकी गणना निम्न प्रकार से की जा सकती है।

: शास्त्रों के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष में द्वितीया तिथि जब अपराह्न (दिन का चौथा भाग) के समय आये तो उस दिन भाई दूज मनाई जाती है। अगर दोनों दिन अपराह्न के समय द्वितीया तिथि लग जाती है तो भाई दूज अगले दिन मनाने का विधान है। इसके अलावा यदि दोनों दिन अपराह्न के समय द्वितीया तिथि नहीं आती है तो भी भाई दूज अगले दिन मनाई जानी चाहिए। ये तीनों मत अधिक प्रचलित और मान्य है।
: एक अन्य मत के अनुसार अगर कार्तिक शुक्ल पक्ष में जब मध्याह्न (दिन का तीसरा भाग) के समय प्रतिपदा तिथि शुरू हो तो भाई दूज मनाना चाहिए। हालांकि यह मत तर्क संगत नहीं बताया जाता है।
: भाई दूज के दिन दोपहर के बाद ही भाई को तिलक व भोजन कराना चाहिए। इसके अलावा यम पूजन भी दोपहर के बाद किया जाना चाहिए।

:- 20 नवंबर, शुक्रवार : छठ पूजा
छठ पर्व या छठ पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाने वाला पर्व है। इसे सूर्य षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व दिवाली के 6 दिन बाद मनाया जाता है।
बिहार और पूर्वी उत्‍तर प्रदेश का सबसे प्रमुख त्‍योहार छठ पूजा होता है। इस बार छठ पूजा 20 नवंबर को पड़ रही है। ऐसे में छठ पूजा का पर्व 18 नवंबर से शुरू हो जाएगा, क्योंकि यह त्योहार 4 दिनों का होता है। छठी माई की पूजा का महापर्व छठ दीपावली के 6 दिन बाद मनाया जाता है। छठ पूजा में सूर्य देवता की पूजा का विशेष महत्‍व होता है।
मान्यता है कि छठ माता सूर्य देवता की बहन हैं। सूर्य देव की उपासना करने से छठ माई प्रसन्न होती हैं और मन की सभी मुरादें पूरी करती हैं। छठ की शुरुआत नहाय खाय से होती है और 4 दिन तक चलने वाले इस त्‍योहार का समापन उषा अर्घ्‍य के साथ होती है।

छठ पूजा 2020 मुहूर्त… Chhath Puja 2020 Muhurta
20 नवंबर (संध्या अर्घ्य) सूर्यास्त का समय :17:25:26
21 नवंबर (उषा अर्घ्य) सूर्योदय का समय :06:48:52

18 नवंबर को नहाय खाय, 19 नवंबर को खरना, 20 नवंबर को संध्या अर्घ्य और 21 नवंबर को उषा अर्घ्‍य के साथ इसका समापन होगा। इन 4 दिनों तक सभी लोगों को कड़े नियमों का पालन करना होता है।

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