देश के नाम पिछले संदेश में जिस Y2K प्रॉब्लम का जिक्र किये मोदी, वो थी क्या ?

0
184

हाल ही में प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए जिस Y2K प्रॉब्लम का जिक्र किया था। इस समस्या को कुछ लोगों ने सदी का सबसे बड़ा झूठ करार दिया था। ऐसा माना जाता था कि 31 दिसंबर 1999 के बाद सभी कंप्यूटर काम करना बंद कर देंगे इसके पीछे तर्क यह दिया गया कि कंप्यूटर 1900 और 2000 में अंतर समझने में असमर्थ है। इसी समस्या को देखते हुए दुनिया भर के सॉफ्टवेयर इंजीनियर केवल इसी समस्या पर काम करने लग गए थे क्योंकि इससे इकोनामी क्रैश होने का खतरा था। इसीलिए इसे millennium bug भी कहा गया था।

क्यों आई ये समस्या?
1960 के दशक में जब सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग का दौर आया तब डाटा स्टोर करना बहुत महंगा हुआ करता था जोकि लगभग $100/kilobyte था। तब सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने सुझाव दिया की साल के नंबर को पूरा लिखने के बजाय केवल आखरी दो नंबर लिख सकते हैं जैसे 2001 को 01 . लेकिन इससे एक समस्या यह सामने आई थी 1900 और 2000 दोनों के आखिर में 00 आता है यही कारण था इस y2k प्रोबलम का। 1993 में कंप्यूटर वर्ल्ड मैगजीन ने पहली बार इस समस्या के बारे अपने आर्टिकल Doomsday 2000 में बताया।

क्या हो सकते थे परिणाम?
इसको लेकर दुनिया भर के देशों ने कयास लगाए की कंप्यूटर सिस्टम क्रश हो जाएगा जिससे क्रेडिट कार्ड काम करना बंद कर देंगे, बैंकों का रिकॉर्ड डिलीट हो जाएगा, एयर ट्रेफिक कंट्रोल सिस्टम, डिफेंस सिस्टम, अस्पतालों मैं कंप्यूटर काम करना बंद कर देंगे। कई देशों ने इस समस्या से निजात पाने के लिए सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में बिलीयन डॉलर्स का निवेश किया और 1993 के बाद उनके पास केवल 7 साल से इस समस्या का समाधान ढूंढने के लिए लेकिन दूसरी ओर रूस जैसे कुछ देश ऐसे भी थे जिन्होंने इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया और ऐसी रिपोर्ट को भी पूरी तरह खारिज कर दिया था। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया भर के देशों ने $600 का निवेश केवल y2k समस्या के लिए किया था।

नतीजों ने सबको चौंका दिया
31 दिसंबर 1999 को जितने भी अनुमान लगाए गए थे। वह सभी अपने आप ही खारिज हो गए क्योंकि कंप्यूटर पहले की तरह काम कर रहे थे और जैसा रिपोर्ट में कहा गया था वैसा कुछ नहीं हुआ। केवल कुछ जगहों पर ही हैं इसका असर देखने को मिला जैसे जापान में Nuclear Power plant के बाहर रेडिएशन को मॉनिटर करने वाला यांत्र खराब हो गया था। ऑस्ट्रेलिया में बस टिकट सिस्टम फेल हो गया था और अमेरिका में लॉटरी मशीन खराब हो गई थी। भारत में इसका असर यह देखने को मिला के भारत की IT फील्ड में अचानक से तेजी आ गई।