देश का सवाल: क्या कोरोना को लेकर सुधर रहे हालात? R फैक्टर से समझिए जवाब

0
63

नई दिल्ली:  देश में कोरोनावायरस (Coronavirus) के मामले अगर हर रोज 50 हजार का आंकड़ा पार कर रहे हैं, तो वहीं हर रोज ठीक होने वालों की संख्या भी 50 हजार के करीब पहुंच गई है. यह कहना फिलहाल जल्दबाजी होगा कि देश में कोरोनावायरस (COVID-19) के मामलों में सुधार हो रहा है लेकिन हालिया आंकड़ों के अनुसार, स्थिति मामूली रूप से कुछ सुधरती हुई तो जरूर नजर आ रही है. R फैक्टर, ज्यादातर देश इसी मानक के जरिए कोरोना के मामलों को नजर बनाए हुए हैं.

यह R दर्शाता है कि कोरोनावायरस कितना संक्रामक है- यानी एक कोरोना मरीज द्वारा कितने अन्य लोग संक्रमित हुए हैं. अच्छी खबर यह है कि भारत में R दर लगातार कम हो रही है. दो हफ्ते पहले यह 1.19 था और 8 अगस्त को यह 1.07 रह गया. अगर यह ऐसे ही कम होता है तो कोरोना संकट के बीच यह देश के लिए अच्छी खबर है. इसके 1.0 से कम आने से जरूर हम कुछ दूर हैं और यही हमारा लक्ष्य होना चाहिए.

नए मामलों में वृद्धि की दर

नए मामलों में हर दिन इसके प्रतिशत में वृद्धि अब 3 प्रतिशत पर मंडरा रही है. दो सप्ताह पहले यह 4 प्रतिशत से कुछ नीचे थी और यह मामलों में कमी के कुछ संकेत दिखा रहा है लेकिन कई कारक इसके कारण बदल सकते हैं. हालांकि, इसमें कोई संदेह नहीं है कि 3 प्रतिशत दैनिक वृद्धि की यह मौजूदा दर अभी भी बहुत दूर है, यह वैश्विक स्तर की तुलना में बहुत ज्यादा है. वास्तव में, भारत की दैनिक विकास दर 3 प्रतिशत ब्राजील के मुकाबले दोगुनी है. यह अमेरिका की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है. नतीजतन, यह महत्वपूर्ण है कि यह वर्तमान और स्वागत योग्य कमी 4 प्रतिशत से 3 प्रतिशत तक दो सप्ताह के अंतराल में बनी रहनी चाहिए.

पॉजिटिविटी रेट

शायद सबसे बड़ा परिवर्तन पॉजिटिविटी रेट प्रतिशत (प्रत्येक 100 परीक्षणों में से सकारात्मक परीक्षण करने वाले लोगों की संख्या) में मामूली लेकिन प्रत्यक्ष गिरावट है. हालांकि यह अभी भी 10 प्रतिशत से बहुत अधिक है. यह दो सप्ताह पहले के बढ़ते रुझान की तुलना में बहुत बेहतर है, जब यह 12 प्रतिशत पर पहुंच गया था. इसके 10 प्रतिशत से नीचे आने की जरूरत है. वास्तव में, अधिकांश अन्य देशों में कोरोना का पॉजिटिविटी रेट हमारे मुकाबले बहुत कम है.

टेस्ट, टेस्ट और टेस्ट

भारत में कोरोना को लेकर एक अच्छी बात यह भी है कि देश में तेजी से टेस्टिंग के आंकड़े बढ़ रहे हैं. देश में हर रोज करीब 6 लाख टेस्ट हो रहे हैं. बहुत जल्द इसे 10 लाख पर पहुंचाना ही होगा. फिलहाल मौजूदा हालातों को देखते हुए यह स्थिति दो हफ्ते पहले से बेहतर है, जब हर रोज करीब 3.5 लाख टेस्ट हो रहे थे.

सावधानी

कुछ अन्य कारक हालांकि किसी भी आशावाद को कम कर सकते हैं. सबसे पहले, नए मामलों में कम वृद्धि आंशिक रूप से रैपिड एंटीजन टेस्टिंग (RAT) में दुर्भाग्यपूर्ण वृद्धि के कारण हो सकती है. एक दिन में 6 लाख से ज्यादा टेस्टिंग की संख्या बढ़ने का मुख्य कारण ज्यादा से ज्यादा एंटीजन टेस्ट (RAT) और कम RT-PCR टेस्टिंग है. एंटीजन टेस्ट बहुत अविश्वसनीय है और बड़ी संख्या में गलत रिपोर्ट करते हैं. यानी रैपिड एंटीजन टेस्टिंग के अनुसार आप संक्रमित नहीं हैं, लेकिन असल में आप कोरोना संक्रमित होते हैं. कुल मिलाकर एंटीजन टेस्ट भ्रामक और नीतिगत निर्णयों के लिए खराब हैं.

पॉजिटिविटी रेट में कमी इसका परीक्षण किए जाने वाले लोगों के प्रकार में बदलाव के कारण हो सकती है. इससे पहले जिन लोगों में लक्षण दिखाई देते थे, उनका टेस्ट किया जाता था, लेकिन अब कई अन्य कारणों से भी लोगों के टेस्ट किए जा रहे हैं. मिसाल के तौर पर एयर ट्रैवल से पहले, ऑफिस में काम पर जाने से पहले भी लोगों के कोरोना टेस्ट किए जा रहे हैं. अंत में, PCR टेस्ट के बजाय ज्यादा RAT टेस्ट करना, अनिवार्य रूप से परीक्षण की कार्यप्रणाली में बदलाव है और यह R प्रभावी दर की गणना को भी प्रभावित कर सकता है.