दिव्यांग मुस्लिम का सारथी बना हिंदू भाई, 380 किलोमीटर साथ चलकर पहुंचाया घर

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कोरोना महामारी के चलते देश मे लॉक डाउन लगा हुआ है. जिसके चलते बाहरी राज्यों से दिहाड़ी मजदूर अपने अपने घरों को निकाल पड़े है. सरकारे भले ही हर मुमकिन कोशिश कर हर किसी दिहाड़ी मजदूर को उनके घर पहुंचाने की जुगत में जुटी है. लेकिन बावजूद इसके बहुत से ऐसे लोग है जो पैदल या साईकल पर या फिर किसी ओर तरह सैकड़ो किलोमीटर का सफर तय कर अपने अपने घरों पर पहुंचने की कोशिश कर रहे है.

ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के जनपद मुज़फ्फरनगर में उस समय सामने आया जब एक दिव्यांग मुस्लिम व्यक्ति गय्यूर का सहारा बन एक हिंदू युवक अनिरुद्ध ने 5 दिनों में 380 किलोमीटर का पैदल सफर कर राजस्थान के जोधपुर से मुजफ्फरनगर में गय्यूर को उसके घर छोड़ने के लिए पहुंचकर एक सम्प्रदायिक मिसाल पैदा की.

अनिरुद्ध महाराष्ट्र के नागपुर का रहने वाला है. वह जोधपुर में दिहाड़ी मजदूर था. लॉक डाउन के चलते वह भी अपने घर नागपुर जाने के लिए निकला था. उसी दौरान उसकी और गय्यूर की मुलाक़ात राजस्थान के एक कैम्प में हुई. दिव्यांग गय्यूर मुज़फ्फरनगर अपने घर आना चाहता था. लेकिन आने का कोई जरिया नहीं था. जिसपर अनिरुद्ध ने पहले गय्यूर को उसके घर छोड़ने का फैसला किया.

दिव्यांग साईकल पर सवार गय्यूर के साथ अनिरूद्ध ने 5 दिनों में दिन रात पैदल चलकर 380 किलोमीटर का सफर तय कर पहुंच गया. मुजफ्फरनगर स्थित गय्यूर के घर अभी फिलाल अनिरुद्ध गय्यूर के घर पर ही रुका हुआ है. और वह अब उत्तर प्रदेश सरकार से उसे उसके घर छोड़ने की गुहार लगा रहा है.