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तीसरा विश्वयुद्ध कराने पर तुला तुर्की, आर्मेनिया-अजरबैजान की जंग में अपनी सेना भेजेगा, सहन नही करेगी महाशक्ति?

आर्मीनिया और अजरबैजान की जंग में अब तक अप्रत्‍यक्ष रूप से शामिल तुर्की अब खुलकर अजरबैजान के समर्थन में आता दिख रहा है। मध्‍य एशिया में ‘खलीफा’ बनने की चाहत रखने वाले तुर्की ने अब ऐलान किया है कि अगर अजरबैजान की ओर से अनुरोध आया तो वह अपनी सेना को भेजने के लिए तैयार है। सुपरपावर रूस के पड़ोसी देशों आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच नागोर्नो-काराबाख इलाके पर कब्‍जे के लिए जंग चल रही है और अगर तुर्की इसमें शामिल होता है तो तीसरे विश्‍व युद्ध का खतरा पैदा हो जाएगा।

तुर्की के उपराष्‍ट्रपति फौत ओकताय ने कहा है कि अगर अजरबैजान की ओर से सेना भेजने का अनुरोध आता है तो तुर्की अपने सैनिकों और सैन्‍य सहायता को देने से हिचकेगा नहीं। हालांकि उन्‍होंने यह भी कहा कि अभी तक इस तरह का कोई अनुरोध अजरबैजान की ओर से नहीं आया है। तुर्की ने अजरबैजान को अपना पूरा समर्थन देते हुए आरोप लगाया कि आर्मीनिया बाकू की जमीन पर कब्‍जा कर रहा है।

फ्रांस, रूस और अमेरिका पर बरसे तुर्की के उपराष्‍ट्रपति
बुधवार को सीएनएन के साथ बातचीत में तुर्की के उपराष्‍ट्रपति ने फ्रांस, रूस और अमेरिका के नेतृत्‍व वाले गुट की आलोचना की और कहा कि यह समूह नहीं चाहता है कि नागोर्नो-काराबाख का विवाद खत्‍म हो। उन्‍होंने यह भी आरोप लगाया कि यह समूह आर्मीनिया की राजनीतिक और सैन्‍य रूप से मदद कर रहा है। बता दें कि फ्रांस, रूस और अमेरिका के नेतृत्‍व वाला यह समूह आर्मीनिया-अजरबैजान के बीच विवाद को सुलझाने के लिए मदद कर रहा है।

इस बीच अजरबैजान ने दावा किया है कि उसने आर्मीनिया के कब्‍जे से 21 और गांवों को मुक्‍त करा लिया है। उसका कहना है कि अब तक की जंग में 130 कस्‍बों को मुक्‍त करा लिया गया है। आर्मीनिया ने इस दावे का खंडन किया है। आर्मीनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान ने कहा है कि नागोर्नो-काराबाख और उसके आसपास के इलाके में चल रही जंग का राजनयिक समाधान मुमकिन नहीं है। तुर्की के इस ऐलान के बाद अब फ्रांस और रूस जैसे देश भी इस जंग में उतर सकते हैं जिससे तीसरे विश्‍वयुद्ध का खतरा मंडराने लगा है। आइए जानते हैं कि कौन किस देश के साथ है….

तुर्की, पाकिस्‍तान, इजरायल.. ये हैं अजरबैजान के ‘दोस्‍त’


नागोर्नो-काराबाख की जंग में तुर्की और उसका पिछलग्‍गू पाकिस्‍तान खुलकर अजरबैजान का समर्थन कर रहे हैं। तुर्की ने पिछले साल अजरबैजान के साथ 10 संयुक्‍त सैन्‍य अभ्‍यास किए थे। खबरों में कहा गया था क‍ि अजरबैजान के अंदर तुर्की अपना एक स्‍थायी सैन्‍य अड्डा बनाने में जुट गया है। नागोर्नो-काराबाख में जारी वर्तमान जंग में तुर्की खुलकर हथियारों की मदद कर रहा है। तुर्की के ड्रोन विमान आर्मीनिया में कहर ढा रहे हैं। आर्मीनिया का दावा है कि तुर्की ने अपने F-16 लड़ाकू विमान भी अजरबैजान को दिए हैं।

खबरों में कहा जा रहा है कि तुर्की ने अपने 6 F-16 फाइटर जेट अजरबैजान के एयरबेस पर छोड़ रखे हैं। इससे तुर्की के आर्मीनिया पर हमले की आशंका बढ़ती जा रही है। उधर, तुर्की के इशारों पर नाचने वाले ‘आतंकिस्‍तान’ पाकिस्‍तान ने भी अपने सीरिया में जंग लड़ रहे सैकड़ों आतंकियों को अजरबैजान भेज दिया है। आर्मीनिया के उपविदेश मंत्री ऐवेट अडोन्ट ने एक न्यूज पोर्टल से बात करते हुए कहा था कि इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है कि पाकिस्तान के लड़ाके अजरबैजान में आतंकियों के साथ मिलकर लड़ रहे हैं। इस खुलासे के बाद पाकिस्तान बौखला गया है।

इजरायल के घातक हथियारों के दम पर कूद रहा अजरबैजान
अजरबैजान की सेना आर्मेनिया के सैनिकों और टैंकों को निशाना बनाने के लिए इजरायली Harop Kamikaze Drones का इस्तेमाल कर रही है। ये ड्रोन आत्मघाती होते हैं, जो दुश्मन के क्षेत्र की रेकी करने के अलावा अगर टॉरगेट दिखाई दे दिया तो उससे भिड़कर खुद को उड़ा लेते हैं। इस कारण आर्मेनिया की सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनके कई सैनिक इस ड्रोन के हमलों में मारे गए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, अजरबैजान के कुल हथियार खरीद का 60 फीसदी हिस्सा इजरायल से आता है। ऐसे में इजरायली हथियारों की बदौलत वह आर्मेनिया की सेना पर भारी पड़ रहा है।

आर्मीनिया के समर्थन में महाशक्तियां, तीसरे विश्‍वयुद्ध का खतरा
तुर्की के सेना भेजने के ऐलान के बाद अब इस इलाके से तीसरे विश्‍वयुद्ध के शुरू होने का खतरा पैदा हो गया है। दरअसल, रूस इस जंग में अभी तक खुलकर आर्मीनिया का समर्थन नहीं कर रहा है लेकिन अगर तुर्की की सेना ने हमला किया तो आर्मीनिया की सेना की मदद के लिए आना होगा। न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक आर्मेनिया और रूस में रक्षा संधि है और अगर अजरबैजान के ये हमले आर्मेनिया की सरजमीं पर होते हैं तो रूस को मोर्चा संभालने के लिए आना पड़ सकता है। रूस और तुर्की में पहले ही लीबिया और सीरिया के गृहयुद्ध में तलवारें ख‍िंची हुई हैं। इसके बाद भी दोनों देशों के बीच व्‍यापारिक संबंध बने हुए हैं। तुर्की ने अमेरिका को नाखुश करते हुए रूस से S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम खरीदा है। हाल ही में तुर्की ने इसका परीक्षण भी किया था।

उधर, इस जंग में फ्रांस ने खुलकर आर्मीनिया का समर्थन किया है। आर्मीनिया-अजरबैजान की जंग से नाटो के दो सहयोगी देशों फ्रांस और तुर्की में विवाद गहरा गया है। फ्रांस में आर्मीनियाई मूल के बड़ी संख्‍या में लोग रहते हैं। तुर्की इस युद्ध में खुलकर अजरबैजान का न केवल हर तरह से समर्थन कर रहा है, बल्कि धमकी भी दे रहा है। बुधवार को तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुट कावुसोग्‍लू ने आरोप लगाया कि फ्रांस आर्मीनिया के अजरबैजान में कब्‍जे को अपना समर्थन दे रहा है। इस आलोचना पर फ्रांस के राष्‍ट्रपति ने तुर्की को करारा जवाब दिया। उन्‍होंने कहा कि तुर्की युद्ध जैसी धमकी दे रहा है। मैक्रान ने कहा कि फ्रांस इसे स्‍वीकार नहीं करेगा। माना जा रहा है कि अगर जंग होती है तो फ्रांस आर्मीनिया की मदद के लिए आगे आ सकता है।

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