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ट्रंप को मोदी का संदेश, देश से बढ़कर नहीं है दोस्ती, किलर ड्रोन की जरूरत नहीं तो खरीदेंगे भी नहीं

वॉशिंगटन
अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव में भारत का फायदा उठाने में लगे राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप को नई दिल्‍ली ने पिछले दिनों बड़ा झटका दिया। भारत ने अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो के दबाव के बाद भी अमेरिका के हथियारों से लैस ड्रोन MQ-9 रीपर को खरीदने से इनकार कर दिया। दरअसल, ट्रंप इस अरबों डॉलर की डील के जरिए चुनाव प्रचार के अहम मोड़ पर इसे विदेश नीति की ‘जीत’ के रूप में दिखाना चाहते थे।

डोनाल्‍ड ट्रंप प्रशासन ने इस ड्रोन को खरीदने के लिए भारत पर काफी दबाव भी डाला था। अमेरिका ने MQ-9 रीपर ड्रोन के भारत को बिक्री की मंजूरी दे दी है और उसका मानना है कि चीन के साथ सीमा पर घातक झड़प में यह ड्रोन काफी मददगार साबित हो सकता है। ट्रंप प्रशासन के कई अधिकारियों ने यूएस न्‍यूज को बताया कि ड्रोन विमानों की बिक्री माइक पोम्पियो और रक्षा मंत्री मार्क एस्‍पर की भारत यात्रा का मुख्‍य अजेंडा था लेकिन भारत ने इसे मंजूरी नहीं दिया।

अमेरिकी ड्रोन काफी मंहगे
सूत्रों के मुताबिक ये अमेरिकी ड्रोन काफी मंहगे हैं, इस‍ वजह से भारत ने उनकी खरीद को मंजूरी नहीं दी। एक MQ-9 रीपर ड्रोन की कीमत करीब एक करोड़ 60 लाख डॉलर है। उन्‍होंने कहा कि भारत कई और हथियार खरीदने चाहता है लेकिन उसने चुनाव तक के लिए उसे टाल दिया है। बताया जा रहा है कि ट्रंप इस डील को विदेश नीति की जीत के रूप में भुनाना चाहते थे लेकिन भारत के इस फैसले उन्‍हें झटका लगा है। एक विशेषज्ञ ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के लिए यह फैसला रणनीतिक से ज्‍यादा राजनीतिक था।

भारत रक्षा खरीद को तेज कर रहा
बता दें कि चीन के साथ बॉर्डर पर तनाव को देखते हुए भारत अपनी रक्षा खरीद को तेज कर रहा है। वेपंस सिस्‍टम से लेकर मिसाइल टेक्‍नोलॉजी तक भारत में ही डेवलप करने को प्राथमिकता दी जा रही है। मगर जरूरत के मुताबिक, विदेश से भी खरीद हो रही है। भारतीय रक्षा मंत्रालय पिछले दिनों अमेरिका से 30 जनरल एटॉमिक्स एम क्यू- 9 रीपर ड्रोन खरीदने की तैयारी कर रहा था। यह डील करीब 22,000 करोड़ रुपये में हो सकती है।

सूत्रों के मुताबिक इतना ज्‍यादा पैसा खर्च होता देख भारत ने इस डील को फिलहाल के लिए रद्द कर दिया है। यह डील दो हिस्‍सों में होनी थी। पहले छह रीपर मीडियम ऑल्टिट्यूड लॉन्‍ग एंड्योरेंस ड्रोन्‍स खरीदे जाने थे जिनकी डिलीवरी अगले कुछ महीनों में होनी थी। बाकी 24 ड्रोन्‍स अगले तीन साल में डिलीवर होने थे।

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