ख़बरराजनीति

टूटने वाली है भाजपा और जदयू की साझेदारी, साफ-साफ बोल दिया है बड़ा ‘संकेत’

बिहार में चुनाव अपने चरम पर है। एक दौर का मतदान हो चुका है। एक तरफ जहां सियासी पारा गर्म हो रहा है तो दूसरी ओर बीजेपी जेडीयू गठबंधन को लेकर सबसे ज्यादा चर्चाएं हो रही हैं। जेडीयू के विज्ञापनों में तो पीएम मोदी की तस्वीर है लेकिन बीजेपी के प्रमुख विज्ञापनों में नीतीश का नामों-निशान तक नहीं है। जिससे नीतीश की चिंताओं में लगातार इजाफा हो रहा है। बीजेपी साफ संकेत भी देने लगी है कि वो नीतीश के साथ शायद चुनाव के बाद गठबंधन न करे और ये नीतीश के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका होगा।

दरअसल, विधानसभा चुनावों को लेकर BJP के विज्ञापनों और पोस्टरों में सिर्फ प्रधानमंत्री को ही दिखाया गया है। अखबारों में भी इसी तरह से केवल पीएम मोदी ही नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर जेडीयू के पोस्टर में नीतीश के साथ पीएम मोदी की भी तस्वीर है। इस पूरे मामले के बाद बीजेपी को एहसास हुआ कि मामला बढ़ रहा है तो फिर कुछ पोस्टरों और विज्ञापनों में नीतीश भी दिखे लेकिन एक कोने में।

नीतीश को बीजेपी की केवल राज्य ईकाई ही नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री द्वारा भी इग्नोर किया जा रहा है। पीएम मोदी ने भी अपनी रैलियों में एनडीए के विकास कार्यों का जिक्र तो किया है लेकिन नीतीश का नाम कहीं नहीं लिया। सासाराम की पहली रैली में नाम जरूर लिया था पर वो भी केवल सांकेतिक तौर ही था। सुशील मोदी पहले ही कोरोना संक्रमण के कारण चुनाव में साइडलाइन हो चुके हैं। दूसरी ओर केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद से लेकर सभी स्टार प्रचारकों ने भी नीतीश को ज्यादा तवज्जों नहीं दी है जो कि नीतीश के लिए एक झटके की तरह ही है।

बीजेपी अपनी नीतियों में तो ये बोल रही है कि नीतीश ही बिहार के सीएम होंगे, लेकिन अंदरखाने बीजेपी की अपनी रणनीति अपने सार्वजनिक बयानों से अलग जा रही है। बीजेपी बिहार के गठबंधन में नंबर दो है। नीतीश ने 15 वर्षों तक शासन किया है इसलिए नीतीश का यहां दबदबा है। ऐसे में चुनाव नतीजों के पहले बीजेपी कोई भी ऐसा काम नहीं करना चाहती कि नीतीश नाराज हो जाएं शायद इसीलिए वो अभी गठबंधन के मामले में खुलकर नहीं बोल रही है।

लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान पहले ही कह चुके हैं कि चुनाव के बाद वे बीजेपी के साथ गठबंधन करेंगे। बीजेपी के बागी नेता लोजपा से चुनाव लड़ रहे हैं। इसको लेकर ये भी कहा जा रहा है कि बीजेपी ने अपने उम्मीदवार अंदरखाने लोजपा को दिए हैं। ऐसे में ये कहा जा रहा है कि बीजेपी चुनाव के बाद नीतीश को झटका दे सकती है। सार्वजनिक मंचों पर बीजेपी का बोलना भले कुछ भी हो लेकिन उसके द्वारा लगातार निकाले जा रहे विज्ञापन नीतीश की चिंताओं को बढ़ा रहे हैं। ये भी इस बात का एक बड़ा कारण है कि जदयू के नीतीश कुमार अपनी रेलियों में लगातार अपना आपा खो रहे हैं।

गौरतलब है कि इस मामले में लगातार बीजेपी से सवाल भी पूछे जा रहे हैं लेकिन किसी भी नेता की तरफ से कोई खास जवाब नहीं दिया जा रहा है। बीजेपी के कई नेता तो अब अंदरखाने ये भी कहने लगे हैं कि नीतीश कुमार के खिलाफ लगातार लोगों के मन में नकारात्मकता का माहौल बन रहा है और हमें ये फीडबैक के तौर पर मिला है। वो ये भी कह रहे हैं कि नीतीश के भ्रष्टाचार और अराजक राज से बचने के लिए जनता को हमें वोट करना चाहिए।

नीतीश कुमार को पता नहीं है कि उनका चेहरा पोस्टरों और विज्ञापनों में न होना बीजेपी द्वारा उन्हें दिया जा रहा एक संकेत है कि बीजेपी चुनाव बाद उनसे हाथ जोड़ लेगी, और ये नीतीश के लिए राजनीतिक इतिहास के सबसे बड़े झटके की तरह ही होगा। 

Back to top button