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‘जो कर रहे #MeToo को ख़ारिज, वो पढ़ें अकबरनामा और अकबर का कारनामा’

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#Metoo अब मोदी सरकार के दरवाजे पर भी दस्तक दे चुका है। भाजपा के मंत्री, सांसद और पूर्व संपादक एमजे अकबर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा है।

दरअसल सात अक्टूबर को पत्रकार रोहिणी सिंह ने ट्वीट किया कि ”भारत की पत्रकारिता के इतिहास का सबसे बड़ा Sexual Harasser यौन प्रताड़क सत्ता में बैठा है। ऐसा कैसे हो सकता है किसी ने उसके बारे में नहीं लिखा”

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रोहिणी सिंह के इस ट्वीट के बाद एमजे अकबर पर आरोपों की झड़ी लग गयी। पत्रकार प्रिया रमानी ने लिखा कि उन्होंने पिछले साल ‘वोग’ पत्रिका में अपने साथ हुए यौन शोषण का स्मरण लिखा था लेकिन तब एकजे अकबर के नाम का जिक्र नहीं किया था। अब कर रही हूं। प्रिया रमानी ने 2017 की स्टोरी का लिंक शेयर करते हुए लिखा है कि यह कहानी जिससे शुरू होती है, वह एमजे अकबर हैं।

प्रिया रमानी के ट्वीट के कुछ घंटों के अंदर ही तीन और महिला पत्रकारों ने एमजे अकबर पर आरोप लगाया। ये सभी यौन उत्पीड़न के आरोप हैं।

पत्रकार प्रेरणा सिंह बिंद्रा ने भी एमजे अकबर पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। एमजे अबकर पर आरोपों की संख्या बढ़ रही है। लेकिन मोदी सरकार अपने विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर पर लगे आरोपों पर कुछ भी नहीं बोल रही।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से जब ‘ट्रिब्यून’ की पत्रकार स्मिता शर्मा ने पूछा कि क्या एमजे अकबर के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाएगी तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम ने एमजे अकबर पर कटाक्ष करते हुए लिखा है ”जो लोग #MeToo मुहिम को तरह-तरह की दलीलें देकर ख़ारिज कर रहे हैं, उन्हें अकबरनामा और अकबर का कारनामा पढ़ना चाहिए। एक जूनियर जर्नलिस्ट लड़की के साथ इतना बड़ा संपादक क्या क्या करने की हिमाक़त कर सकता है, पढ़िए और समझिए।” 

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