चीन विवाद पर जब अमेरिका खुलकर दे रहा भारत का साथ, तब भी ‘कड़ी निंदा’ पर अटके हैं राजनाथ !

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जब से भारत और चीन के बीच लद्दाख में बार्डर को लेकर चीन के साथ झड़प हुई है और दोनों देशों की सेनाएँ एक दूसरे के सामने खड़ी हैं तब से अमेरिका कई बार इस मामले पर चीन के खिलाफ बयान दे चुका है। ऐसा लग रहा है कि भारत-चीन सीमा विवाद में स्पष्ट रूप से अमेरिका भारत का साथ देगा। परंतु एक बात और ध्यान देने वाली है और वह है भारत के रक्षा मंत्री की इसपर चुप्पी। जब अमेरिका इतना प्रखर हो कर भारत का साथ देने के लिए आतुर दिखाई दे रहा है तो रक्षा मंत्री इतने चुप क्यों है?

दरअसल, अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भारत-चीन सीमा पर बढ़ते तनाव पर चिंता जाहिर करते हुए चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की स्पष्ट आलोचना करते हुए एक इंटरव्यू में कहा कि “आज भी हम देख रहे हैं कि चीन भारत के उत्तरी हिस्से में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर सैनिकों की संख्या बढ़ा रहा है। वह विस्तार करना चाहता है।“ CCP की साम्राज्यवादी नीति की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि,”दबदबा कायम करने वाली सरकारें ही ऐसा करती हैं।चीन ने कई ऐसे काम किए हैं जो बताते हैं कि वह अपनी ताकत बढ़ाना चाहता है।“

वहीं भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने पुराने स्वरूप में ही बयान देते हुए कहा है कि, “चीन ने खुद कहा है कि वो सीमा विवाद बातचीत और कूटनीतिक तरीकों से हल करना चाहता है।“ उन्होंने आगे कहा, “भारत की कोशिश है कि तनाव न बढ़े। इसके लिए सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है।”

इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि कौन कितना प्रखर दिखाई दे रहा है। यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने भारत के पक्ष में खुल कर बयान दिया है और इस विवाद में इंटरेस्ट दिखा रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री के बयान से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत-चीन में जारी तनाव को सुलझाने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, दोनों देशों ने उससे इंकार कर दिया था लेकिन इससे अमेरिका का इस मामले पर नजर रखना दिखाता है कि वह एशिया क्षेत्र में हुए किसी भी विवाद पर नजर बनाए हुए हैं और उसे चीन को किसी भी तरह रोकना है। चीन के कारण खतरे को देखते हुए अमेरिका भारत सहित कई देशों के साथ साझेदारी करने की भी सोच रहा है।

वहीं भारत के रक्षा मंत्री ने अभी तक डिफ़ेंसिव अप्रोच अपनाया हुआ है। इससे भारत को ही नुकसान हो सकता है। आज के युग में इन्फोर्मेशन वार अधिक होता है जहां पर दुश्मन से युद्ध के बिना ही युद्ध जीता जाता है। ऐसे युद्ध को जीतने के लिए आवश्यक है कि एक आक्रामक नीति अपनाई जाए और थोड़ा आक्रामक भाषा में बयान दिये जाए और कड़ी कार्रवाई के संकेत दिये जायें।

आज तक को दिये इंटरव्यू में राजनाथ सिंह ने कहा, ‘‘मैं देश को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम भारत के गौरव को किसी भी स्थिति में धूमिल नहीं होने देंगे। भारत पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की स्पष्ट नीति का पालन कर रहा है और यह नया रुख नहीं है। हम लंबे अरसे से इसका पालन कर रहे हैं। कभी–कभी चीन के साथ विवाद उत्पन्न हो जाता है। यह पहले भी हुआ है।”

हालांकि, रक्षा मंत्री का यह बयान भारत चीन सीमा पर पहला बयान था, इससे पहले न तो उन्होंने कोई बयान दिया था न ही किसी प्रकार का ट्वीट किया था।

यहाँ यह समझने वाली बात है कि भारत और चीन पड़ोसी जरूर हैं लेकिन चीन ने शुरू से ही भारत के क्षेत्रों पर अपनी काली नजर गड़ाए रखी है और उसे हड़पने की फिराक में रहता है। ऐसे में चीन पर सिर्फ कार्रवाई ही नहीं, बल्कि उसपर perception के युद्ध में भी दबाव बना कर हराना होगा। राजनाथ सिंह देश के रक्षा मंत्री है और उनके एक आक्रामक बयान से चीन पर भयंकर दबाव बन सकता है जिसके बाद चीन या तो गलती करेगा या पीछे हट जाएगा। अब समय है, उन्हें कड़ी निंदा से ऊपर उठ कर एक मजबूत स्टांस लेने का क्योंकि यह सवाल भारत की अखंडता और संप्रभुता का है जिससे कभी भी समझौता नहीं किया जा सकता है।

बता दें कि लद्दाख के पास मई की शुरुआत से ही चीन और भारत के बीच हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। पहले यहां भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प-हाथापाई हुई उसके बाद चीन ने सड़क निर्माण शुरू किया और फिर चीन के 5 हजार सैनिक इकट्ठा होने की खबर सामने आई। चीन ने अपने एयरबेस पर हलचल बढ़ा दी थी।

परंतु इसके जवाब में भारत ने भी पैगोंग सो के आसपास फिंगर इलाके में सैनिकों की संख्या बढ़ाई, और कुछ लड़ाकू विमान भी तैनात किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत की ओर से जारी सड़क निर्माण को भी नहीं रोका गया है और काम लगातार जारी है।

भारत ने सीमा पर चीन को उसके ही अंदाज में जवाब दिया होगा, लेकिन अब देश के रक्षा मंत्री को भी अपने बयानों में धार लनी होगी जिससे चीन पर अतिरिक्त दबाव बनाया जा सके।