गेट आउट चाइना : ड्रैगन को अरबों डॉलर की जोरदार लात मारी सरकार, बोली- ये है फैसले की वजह

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भारत ने 59 चाइनीज एप्स पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। केंद्र की मोदी सरकार ने ये फैसला ऐसे वक्त पर लिया है जबकि दोनों देशों के बीच तनाव बिल्कुल चरम पर है। मंगलवार को कोर कमांडर स्तर की बैठक भी होनी है। इस बैठक में दोनों ओर के सैन्य अधिकारी बातचीत कर कुछ हल निकालने की कोशिश करेंगे। हालांकि ये पहली बार नहीं हो रहा इससे पहले भी दो बार इस स्तर की बैठकें हो चुकी हैं। अब सरकार ने चीन के ऐप्स पर रोक लगाकर चीन को सीधे-सीधे चेतावनी दे दी है।

क्यों लेना पड़ा इतना बड़ा फैसला?
आखिरकार सरकार ने इतना बड़ा फैसला क्यों लेना पड़ा? इसके पीछे तमाम वजहें हो सकती हैं, लेकिन सबसे अहम वजह थी चीन को ये समझा देना कि भारत किसी भी स्तर पर झुकने वाला नहीं है। 15 जून को भारत और चीन (India-China Conflict) के जवानों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। चीन ने इसकी प्लानिंग पहले से कर रखी थी और पूरी तैयारी के साथ भारतीय जवानों पर हमला बोल दिया। भारतीय जवानों ने ऐसी परिस्थिति में भी चीन के जवानों को ऐसा सबक सिखाया कि उनको उल्टे पैर वापस भागना पड़ा। इस संघर्ष में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए।

चीन को सीधी चुनौती
इसके बाद चीन को लेकर पूरे देश में गुस्सा था। देश के कई हिस्सों में चीन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए और लोगों ने खुद से ही चीन के प्रोडक्ट्स का बॉयकॉट करना शुरू कर दिया। इसी बीच गूगल प्ले स्टोर में रिमूव चाइना एप्स आया जिसको इंस्टॉल करने पर चीन के जितने भी ऐप होते हैं वो अपने आप हट जाते थे। लेकिन चीन के दबाव में गूगल प्ले स्टोर से इस ऐप को हटा दिया गया। लेकिन तब तक लाखों लोग इसे डाउनलोड कर चुके थे। इन सबसे चीन लगातार परेशान होता रहा। इसी बीच भारत में चीन के कई टेंडर भी रद्द कर दिए गए। कुछ चीनी कंपनियां भारत में कई प्रकार के टेंडर लिए थी। उनको भी रद्द कर दिया गया। इसके अलावा भारतीय इंजीनियर सोनम वांगचुक ने भी चीन के खिलाफ आंदोलन छेड़ रखा है। वांगचुक लगातार लोगों से अनुरोध कर रहे हैं कि चीनी सामानों का बहिष्कार करें। उनको भारी तादाद में लोगों का समर्थन भी मिला है।

टिक टॉक बैन (Tik Tok Ban In India)
भारत सरकार ने जिन 59 ऐप्स पर बैन लगाया है उनमें से सबसे ज्यादा पॉपुलर है टिक टॉक। भारतीय यूजर्स ने टिकटॉक पर साल 2018 के मुकाबले साल 2019 में 6 गुना ज्यादा समय बिताया। आंकड़ों की मानें तो 2019 में भारतीयों ने 5.5 अरब घंटे टिकटॉक चलाया है। मोबाइल और डेटा ऐनालिटिक्स फर्म App Annie के मुताबिक, ऐंडॉयड यूजर्स ने साल 2018 में कुल 900 मिलियन (9 करोड़) घंटे ही टिक-टॉक पर बिताए थे। बता दें कि ग्रोथ के मामले में टिक-टॉक ने अपने फेसबुक जैसे प्रतिद्वंदी को भी पीछे छोड़ दिया है।

Tik Tok यूजर्स में 90 फीसदी की बढ़ोतरी
दिसंबर 2019 में टिक-टॉक के मंथली ऐक्टिव यूजर्स की संख्या 81 मिलियन हो गई। दिसंबर 2018 के मुकाबले यह 90 फीसदी की बढ़ोतरी है। चीन की कंपनी टिक-टॉक के लिए भारत चीन से बाहर सबसे बड़े मार्केट के रूप में उभरकर सामने आया है। बात करें फेसबुक की तो साल 2019 में इसपर भारतीयों ने 25.5 अरब घंटे बिताए। इससे पहले साल के मुकाबले यह सिर्फ 15 फीसदी की ग्रोथ है। इसके साथ ही दिसंबर 2019 में इसके मंथली ऐक्टिव यूजर्स की संख्या में भी 15 फीसदी की ही बढ़ोतरी हुई।

मंत्रालय ने बताई वजह
आईटी मंत्रालय ने सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि उसे विभिन्न स्रोतों से कई शिकायतें मिली हैं, जिनमें एंड्रॉइड और आईओएस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कुछ मोबाइल ऐप के दुरुपयोग के बारे में कई रिपोर्ट शामिल हैं। इन रिपोर्ट में कहा गया है कि ये एप ‘उपयोगकर्ताओं के डेटा को चुराकर, उन्हें भारत के बाहर स्थित सर्वर को अनधिकृत तरीके से भेजते हैं।’ बयान में कहा गया, ‘भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति शत्रुता रखने वाले तत्वों द्वारा इन आंकड़ों का संकलन, इसकी जांच-पड़ताल और प्रोफाइलिंग, आखिरकार भारत की संप्रभुता और अखंडता पर आधात है, यह बहुत अधिक चिंता का विषय है, जिसके लिए आपातकालीन उपायों की जरूरत है।’

ये फैसला भारतीयों की करेगा रक्षा- मंत्रालय
गृह मंत्रालय के तहत आने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने इन दुर्भावनापूर्ण एप्स पर व्यापक प्रतिबंध लगाने की सिफारिश भी की थी। बयान में कहा गया है, ‘इनके आधार पर और हाल ही में विश्वसनीय सूचनाएं मिलने पर कि ऐसे ऐप भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए खतरा हैं, भारत सरकार ने मोबाइल और गैर-मोबाइल इंटरनेट सक्षम उपकरणों में उपयोग किए जाने वाले कुछ एप के इस्तेमाल को बंद करने का निर्णय लिया है।’ बयान में कहा गया है कि यह कदम ‘करोड़ों भारतीय मोबाइल और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के हितों की रक्षा करेगा। यह निर्णय भारतीय साइबरस्पेस की सुरक्षा और संप्रभुता सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम है।’