खास रिपोर्ट: जैश नहीं है आम आतंकी संगठन, असल में ये है पाक सेना का एक्सटेंशन

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जैश महज कोई एक आतंकी संगठन नहीं है, ये पाकिस्तानी सेना का हिस्सा है, उसका एक्सटेंशन है… जिसे कारगिल की हार से तिलमिलाई पाकिस्तानी सेना ने घाटी में फिदायीन हमले के लिए तैयार किया था।

1. जिस फिदायीन आदिल अहमद डार ने इस हमले को अंजाम दिया, उसके वीडियो पर गौर करें तो ये साफ होता है कि उसके पास जितने भी हथियार और गोला बारुद नजर आ रहा है वो मिलिटरी ग्रेड एम्यूनीशन है।

2. तस्वीर में सबसे अहम है आदिल के पीछे रखा नाइट विजन इंफ्रारेड व्यू फाइंटर से लैस ग्रेड वन स्नाइपर राइफल जो दुनिया भर के देशों में सिर्फ सेना के एलीट कमांडो और एंटी टेररिस्ट स्क्वाड इस्तेमाल करते हैं। ये महज इत्तेफाक नहीं हो सकता कि पिछले साल 18 अगस्त को इमरान के पीएम बनने के बाद से घाटी में सुरक्षा बलों को कई बार स्नाइपर अटैक का सामना करना पड़ा है।

ये खास इसलिए है कि दहशतगर्द पिस्तौल या एसॉल्ट राइफल इस्तेमाल करते हैं, बम या हथगोले फेंकते हैं, लेकिन उन्हें सैनिकों की तरह स्नाइपर राइफल इस्तेमाल करना नहीं आता। पाकिस्तान दुनिया का अकेला देश है जो अपनी सेना के बेस्ट स्नाइपर्स को दहशतगर्दी को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल कर रहा है।

3. पिछले साल CRPF कैंप में हुए फिदायीन हमले में एसॉल्ट राइफलों में SCB – steel core bullets – का इस्तेमाल हुआ था। दुनिया के किसी भी देश में किसी आतंकी संगठन के द्वारा ग्रीन बुलेट्स का ये पहला इस्तेमाल था। बुलेट प्रुफ जैकेट से लेकर बुलेट प्रुफ गाड़ियों पर हमले में इस्तेमाल होने वाली ये बुलेट सिर्फ मिलिटरी ही इस्तेमाल करती है।

4. ये महज इत्तेफाक नहीं है कि यू एन सिक्योरिटी काउंसिल में जैशे मोहम्मद को आतंकी संगठन घोषित करने के भारत के प्रस्ताव को चीन नहीं मान रहा। दरअसल चीन इस असलियत से वाकिफ है कि पाकिस्तानी सेना ही जैशे मोहम्मद के नाम पर दहशतगर्दी कर रही है।