क्या कांग्रेस में हुई लोकतंत्र की वापसी, या फिर पार्टी का नेतृत्व ही है अक्षम ?

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खासकर लोकसभा चुनाव 2019 के बाद कांग्रेस नेतृत्व पूरी तरह अक्षम दिख रहा है या पार्टी में लोकतंत्र की वापसी हुई है? वापसी कहना गलत होगा, कारण पार्टी में लोकतंत्र कभी था ही नही. दरअसल, एक परिवार विशेष का हमेशा निर्देश का पालन होता था. दीगर बात है कि सत्ता से बेदखल होने के बाद व अक्षम नेतृत्व के कारण नेता बेलगाम या आजाद हो चुके हैं. जिसे जो इच्छा कर रहा है वह बयान दे रहा है, कभी कभी तो आपस में ही बयानों के जरिये एक दो हाथ कर ले रहे हैं. ऐसे में पार्टी में लोकतंत्र दिख रहा है, यानी बोलने की आज़ादी.

सलमान खुर्शीद ने कहा था कि हमारे नेता हमें छोड़ गए, बेहद बुरे दौर से गुज़र रही है पार्टी. इससे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी कहा था कि पार्टी को अपनी विचारधारा बदलने की जरूरत है. पार्टी के लिए यह बेहद निराशाजनक है. एक नई विचारधारा और एक नई कार्य प्रक्रिया की तत्काल जरूरत है. देश बदल गया है, इसलिए हमें देश के लोगों के साथ जुड़ने के लिए सोच बदलनी होगी. वहीं, जयराम रमेश ने भी पार्टी में बड़े बदलाव की वकालत करते हुए कहा था कि हमें खुद को मजबूत करने की आवश्यकता है. सत्ता खोने के 6 साल बाद भी हम में से कुछ ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे हम अभी भी मंत्री हैं.

संजय निरुपम ने कहा है कि सिर्फ राहुल गांधी ही पार्टी का नेतृत्व कर सकते हैं और वही पार्टी को बचा सकते हैं. जबकि इससे पहले संदीप दीक्षित और शशि थरूर ने कहा था कि कांग्रेस में नए अध्यक्ष का चुनाव होना चाहिए. दरअसल, कांग्रेस पार्टी में गांधी परिवार के खिलाफ और समर्थन में एक बार फिर से बहस शुरू हो गई है. शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व पर सवाल उठाया है. इतना ही नहीं, उन्होंने पार्टी के स्थायी अध्यक्ष के चुनाव की भी बात कही है. शशि थरूर के इस बयान पर अब संजय निरुपम भी भड़क गए हैं. संजय निरुपम ने कहा है कि केवल और केवल राहुल गांधी ही कांग्रेस पार्टी को बचा सकते हैं.

शशि थरूर और संदीप दीक्षित के बयान पर संजय निरुपम ने कहा, गांधी परिवार से बाहर का कोई भी नेता इस समय कांग्रेस का नेतृत्व नहीं कर सकता है. राहुल गांधी इकलौते ऐसे नेता हैं, जो कांग्रेस का नेतृत्व कर सकते हैं और उसे बचा सकते हैं. हमारे नेता सिर्फ गुटों के नेता हैं और ऐसे नेता सिर्फ गुटबाजी को बढ़ावा देंगे. गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम आने बाद अरविंद केजरीवाल की तारीफ करने को लेकर मिलिंद देवड़ा अपनी ही पार्टी के नेता अजय माकन के निशाने पर आ गए थे. अधीर रंजन चौधरी भी बयानों के तीर से नही बचे थे, वह भी केजरीवाल की तारीफ करने से नही चूके थे.

सच तो यह है कि दिल्ली चुनाव में फिर से जीरो पर सिमटने के बाद कांग्रेस पार्टी में उठापटक शुरू हो चुकी है. इसी को लेकर दिल्ली की पूर्व सीएम के बेटे और पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने भी सवाल उठाए हैं. संदीप दीक्षित ने कहा है कि कई महीनों के बाद भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नया अध्यक्ष नहीं चुन सके हैं. पार्टी के सीनियर नेताओं के बारे में संदीप दीक्षित ने कहा कि कभी-कभार आप निष्क्रियता चाहते हैं क्योंकि आप नहीं चाहते हैं कि कुछ हो. जबकि इससे पहले शशि थरूर ने संदीप दीक्षित की बात का समर्थन करते हुए ट्वीट किया था, संदीप दीक्षित ने जो कहा है वह देशभर में पार्टी के दर्जनों नेता निजी तौर पर कह रहे हैं. इनमें से कई नेता पार्टी में जिम्मेदार पदों पर बैठे हैं. मैं सीडब्ल्यूसी से फिर आग्रह करता हूं कि कार्यकर्ताओं में ऊर्जा का संचार करने और मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए नेतृत्व का चुनाव कराएं.

कहानी दिल्ली चुनाव परिणाम से शुरू होती है व दिल्ली में ही बैठे आलाकमान तक जाती है. संदीप दीक्षित ने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा कि इतने महीनों बाद भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नया अध्यक्ष नहीं नियुक्त कर सके. इसका कारण यह है कि वह सब यह सोच कर डरते हैं कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे. संदीप दीक्षित ने कहा कि कांग्रेस के पास नेताओं की कमी नहीं है. अब भी कांग्रेस में कम से कम 6-8 नेता हैं जो अध्यक्ष बनकर पार्टी का नेतृत्व कर सकते हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कभी-कभार आप निष्क्रियता चाहते हैं, क्योंकि आप नहीं चाहते हैं कि कुछ हो.

बहरहाल, कांग्रेस ने बयानबाजी करने वाले नेताओं को नसीहत देते हुए कहा है कि बयानबाजी करने वाले अन्य नेता ज्ञान देने की बयान अपने क्षेत्र में ध्यान दें. और इस बारे में सोचें कि वे चुनावों में क्यों हारे? संदीप दीक्षित के बयान के बारे में रणदीप सुरजेवाला ने कहा, मैंने संदीप दीक्षित जी का बयान नहीं देखा है, लेकिन मैं उनके समेत सभी नेताओं से कहता हूं कि पहले वो यह देखें कि जब चुनाव लड़े तो कितना वोट आए और चुनाव क्यों हारे? इसमें मैं भी हूं. संदीप जी अगर ये सारी मेहनत अपने संसदीय क्षेत्र में लगा दें तो कांग्रेस जीत जाए. उन्होंने कहा, मैं इन नेताओं से कहना चाहता हूं कि पूरे देश को ज्ञान देने की बजाय अपने अपने क्षेत्र में अपने काम से फायदा उठाएं.