कोरोना संकट में योगी बनाए गजब प्लान, सरकारी विमान से यूं कमाएंगे माल !

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फाइल

लखनऊ
लॉकडाउन के दौरान राजस्व की आय बहुत कम हो गई है। खर्चों में कटौती के साथ-साथ योगी आदित्यनाथ सरकार रेवेन्यू बढ़ाने के नए रास्ते तलाश रही है। राज्य सरकार ने अपने राजकीय प्लेन और हेलिकॉप्टर का सीमित कमर्शल इस्तेमाल करने का फैसला लिया है।

राजकीय प्लेन और हेलिकॉप्टर से राजस्व जुटाने के लिए इनका इस्तेमाल एयर ऐंबुलेंस और अन्य राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री को सेवाएं देने के लिए किया जाएगा। इसके लिए सैद्धांतिक सहमति बन गई है। जल्द ही इस प्रस्ताव को धरातल पर उतारने के लिए कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा।

एयर ऐंबुलेंस के दाम होंगे कम
मौजूदा समय में एयर ऐंबुलेंस के रूप में प्राइवेट प्लेन का इस्तेमाल किया जाता है, इस पर बहुत ज्यादा खर्च आता है। राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक एयर ऐंबुलेंस में प्राइवेट कंपनियां लखनऊ से दिल्ली तक के लिए 6 से 7 लाख रुपये वसूलती हैं। वहीं अगर राजकीय प्लेन का इस्तेमाल किया जाएगा तो इन खर्चों में काफी कटौती होगी। एक तरफ तो लोगों को सस्ती ऐंबुलेंस की सुविधा मिलेगी। दूसरी तरफ राज्य सरकार को राजस्व भी मिलेगा।

एयर ऐंबुलेंस के अलावा दूसरे राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री भी राजकीय प्लेन और हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके लिए इच्छुक राज्यों के साथ राज्य सरकार एमओयू साइन करेगी। इसमें प्लेन और हेलिकॉप्टर के उपयोग की शर्तों को रखा जाएगा। साथ ही एक स्टैंडर्ड किराया भी तय किया जाएगा। जो दूसरे राज्यों को उपयोग करने पर चुकाना होगा।

प्लेन और हेलिकॉप्टर का सबसे बड़ा बेड़ा यूपी के पास
यूपी के पास देश के किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे अधिक प्लेन, हेलिकॉप्टर और पायलट का बेड़ा है। यूपी सरकार के पास तीन प्लेन हैं, जबकि 6 हेलिकॉप्टर हैं। साथ ही 17 पायलट हैं। यही वजह है कि यूपी सरकार अपने इस बेड़े का कमर्शल उपयोग करने पर विचार कर रही है। राज्य सरकार को उम्मीद है कि कमर्शल उपयोग से एक तरफ जहां इनके रख-रखाव का खर्च निकलेगा। वहीं राज्य सरकार को अतिरिक्त राजस्व की आमदनी भी होगी। इसका इस्तेमाल प्रदेश की विकास योजनाओं में किया जा सकता है।