कोरोना की 9 वैक्‍सीन फेज 3 ट्रायल में, जानें आप तक कब पहुंचेगी ये दवा?

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कोरोना वायरस के कहर से जूझ रही दुनिया को वैक्‍सीन से ही उम्‍मीद है। इस महीने के अंत तक यह महामारी 10 लाख लोगों की जिंदगी छीन सकती है। ऐसे में जिंदग‍ियां बचाने के लिए वैक्‍सीन की अर्जेंट जरूरत है। मगर वैक्‍सीन बनाने में जल्‍दबाजी भी नहीं की जा सकती क्‍योंकि उससे करोड़ों लोगों की सेहत प्रभावित हो सकती है। वैक्‍सीन के प्रभावी और सुरक्षित होने की तस्‍दीक करनी होगी। दुनियाभर में 180 से भी ज्‍यादा वैक्‍सीन पर ट्रायल चल रहा है। करीब 150 कैंडिडेट्स अभी पाइपलाइन में हैं मगर नौ वैक्‍सीन ऐसी हैं जो ऐडवांस्‍ड स्‍टेज में पहुंच चुकी हैं। रूस ने एक और चीन ने दो वैक्‍सीन को लोगों पर इस्‍तेमाल के लिए मंजूरी दी है मगर इनके फेज 3 ट्रायल अभी पूरे नहीं हुए हैं। आइए जानते हैं कि कोरोना के एक सुरक्षित और प्रभावी टीके को आप तक पहुंचने में अभी कितना वक्‍त लगेगा।

दुनियाभर में कोविड वैक्‍सीन डेवलपमेंट का हाल

दुनियाभर में अभी 142 कोरोना वैक्‍सीन ऐसी हैं जो प्री-क्लिनिकल स्‍टेज में हैं। फेज 1 ट्रायल से 24 वैक्‍सीन गुजर रही हैं जबकि 14 फेज 2 ट्रायल में हैं। तीसरे दौरे के ऐडवांस्‍ड ट्रायल में कुल नौ वैक्‍सीन हैं जिनमें से तीन को लिमिटेड यूज के लिए अप्रूवल दिया गया है।

रूस ने रिलीज कर दी है वैक्‍सीन

रूस ने केवल 76 लोगों पर शुरुआती ट्रायल के बाद ही कोविड वैक्‍सीन जारी कर दी थी। ट्रायल में वैक्‍सीन ऐंटीबॉडीज डेवलप करने में कामयाब रही मगर इंटरनैशनल एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि पूरी तरह सेफ्टी चेक करने के लिए बड़े ट्रायल की जरूरत थी। रूसी अधिकारी अब कह रहे हैं कि फेज 3 ट्रायल पूरा होने के बाद वैक्‍सीन के सर्टिफिकेट का रिव्‍यू किया जाएगा। रूस ने भारत से भी वैक्‍सीन के ट्रायल और प्रॉडक्‍शन को लेकर संपर्क साधा है।

चीन की दो वैक्‍सीन को सीमित इस्‍तेमाल की मंजूरी

चीन ने Sinovac और Sinopharm की एक-एक वैक्‍सीन को लिमिटेड यूज के लिए अप्रूवल मिल चुका है। दोनों वैक्‍सीन का दुनिया के कई देशों में फेज 3 ट्रायल भी चल रहा है। वहीं CanSino Biologics की वैक्‍सीन को भी सेना के लिए इस्‍तेमाल करने की मंजूरी दी जा चुकी है। Sinopharm की एक और वैक्‍सीन फेज 3 ट्रायल में हैं।

ऑक्‍सफर्ड वैक्‍सीन का ट्रायल रुका

ऑक्‍सफर्ड यूनिवर्सिटी-अस्‍त्राजेनेका की वैक्‍सीन का फेज 3 ट्रायल रुक गया है। वैक्‍सीन से एक शख्‍स के बीमार होने की रिपोर्ट्स हैं। ही ऑक्‍सफर्ड-अस्‍त्राजेनेका वैक्‍सीन वैक्‍सीन की ग्‍लोबल रेस में सबसे आगे बताई जा रही थी।

फेज 3 में इनकी वैक्‍सीन भी

रूस, चीन और अस्‍त्राजेनेका के अलावा कई और वैक्‍सीन फेज 3 ट्रायल में हैं। इनमें अमेरिका के मॉडर्ना-नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्‍थ की वैक्‍सीन भी शामिल है। इसके अलावा जर्मनी की बायोएनटेक, अमेरिका की फाइजर की वैक्‍सीन भी फेज 3 ट्रायल से गुजर रही है।

कब तक मिल पाएगी वैक्‍सीन?

रूस ने अपनी वैक्‍सीन Sputnik V का उत्‍पादन शुरू कर दिया है मगर अधिकतर देश उसकी सुरक्षा को लेकर शक जाहिर कर रहे हैं। चीन की दोनों अप्रूव्‍ड वैक्‍सीन में भी कुछ ही देशों ने दिलचस्‍पी दिखाई है। हालांकि वहां पर इसका बड़े पैमाने पर उत्‍पादन शुरू हो गया है। अधिकतर फार्मा कंपनियों अगले साल की शुरुआत तक वैक्‍सीन लॉन्‍च करने का दावा कर रही हैं मगर कोई तारीख देने से साफ इनकार है। ऑक्‍सफोर्ड वैक्‍सीन के ट्रायल में जो परेशानी आई, उससे भी वैक्‍सीन की टाइमलाइन लंबी हो सकती है।

भारत में कोरोना वैक्‍सीन का क्‍या है स्‍टेटस?

भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्‍सीन निर्माता देश है। ऐसे में कोविड वैक्‍सीन कोई भी देश बनाए, बड़े पैमाने पर प्रॉडक्‍शन के लिए उसे भारत से बात करनी होगी। भारत में सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया को ऑक्‍सफोर्ड-अस्‍त्राजेनेका की वैक्‍सीन के फेज 2/3 ट्रायल की मंजूरी मिली है। कंपनी 225 रुपये में वैक्‍सीन लाने का दावा कर रही है। ICMR और भारत बायोटेक की बनाई वैक्‍सीन Covaxin का फेज 2 ट्रायल चल रहा है। इसके अलावा जायडस कैडिला की ZyCov-D भी फेज 2 ट्रायल्‍स से गुजर रही है। इसके अलावा बायोलॉजिकल ई, जेननोवा बायोफार्मास्‍यूटिकल्‍स और इंडियन इम्‍युनोलॉजिकल्‍स भी अलग-अलग वैक्‍सीन का ट्रायल कर रहे हैं।