कोरोना : किस दिशा में बढ़ रही है दुनिया, अब आगे क्या होगा?

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मुंबई
कोरोना महामारी का कहर भारत के कई राज्यों में चरम पर है। अस्पतालों में बेड फुल हैं और देश के कई हिस्सों में कोरोना मरीजों को होम आइसोलेशन के लिए भी निर्देशित किया गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में हेल्थ सेक्टर बुरी तरह से संकट के दौर से गुजर रहा है। यह ऐसा समय है जब मरीज बीमार होने के बावजूद अस्पताल जाने से डर रहे हैं।

मनीपाल अस्पताल के चेयरमैन डॉ. एच सुदर्शन बल्लाल कर्नाटक की कोविड-19 एक्सपर्ट कमिटी के चेयरमैन हैं। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन कोरोना वायरस का दूरगामी उपचार नहीं है। देश भर में वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। इन सबके बीच हमने देखा कि दिल्ली-मुंबई जैसे घनी आबादी वाले राज्यों और खासतौर पर मुंबई का सर्वाधिक घनत्व वाले झुग्गी इलाके धारावी में भी कोरोना संक्रमणों पर काफी हद तक नियंत्रण किया जा सका है। यह अन्य बड़े शहरों के लिए उम्मीद की एक किरण है।

केरल अब भी बेहतर मॉडल
देश का किस राज्य ने कोविड-19 से उपजी परिस्थिति को सबसे बेहतर ढंग से संभाला है? इस सवाल के जवाब में बल्लाल ने कहा कि कर्नाटक ने पहले तीन महीनों में कोरोना वायरस महामारी की स्थिति को अच्छे तरीके से संभाला है। केरल में मामले में बढ़े हैं लेकिन शुरुआत से ही यह प्रदेश कोरोना को नियंत्रित करने के मामले में एक अच्छा मॉडल बना हुआ है। इसके अलावा अन्य राज्य भी तेजी से सीख रहे हैं। दिल्ली और मुंबई में काफी बुरी स्थिति थी लेकिन वे भी अब सही ट्रैक पर आ गए हैं।

सितंबर-अक्टूबर से कम होने लगेगा इन्फेक्शन रेट
बल्लाल ने कहा कि अगले एक-दो महीने में बेंगलुरु में कोरोना अपने चरम पर होगा। अनुमान लगाना कठिन है लेकिन अगले एक-दो महीनों में हम बेंगलुरु में 60 हजार नए मामले देखेंगे। इसके अलावा कर्नाटक राज्य में एक महीने में डेढ़ लाख नए मामले सामने आ सकते हैं। बल्लाल ने बताया कि सितंबर-अक्टूबर तक कोरोना संक्रमण की दर गिरने लगेगी और अगले साल की शुरुआत तक हमारे पास वैक्सीन होगी।

लॉकडाउन समधान नहीं
लॉकडाउन को लेकर डॉ. बल्लाल ने कहा कि जब कोरोना वायरस सबसे पहले आया तो यह हमारे लिए नया था और यह बेहद संक्रामक भी था। राज्यों ने इसके प्रसार को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए थे लेकिन लंबे समय तक लॉकडाउन इस महामारी का उपचार नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर हम स्टेप बाइ स्टेप अनलॉक नहीं होंगे तो हमारी अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। हमारा स्वास्थ्य उद्योग संघर्ष कर रहा है। बच्चों को न तो शिक्षा मिल रही है और न ही टीके लग पा रहे हैं।

ज्यादा घातक नहीं कोरोना
संक्रमण के डर से माता-पिता अपने बच्चों को टीका लगाने के लिए नहीं ले जाना चाहते हैं। ऐसे में समय आ गया है कि हम कोविड-19 का पुनर्मूल्यांकन करें। उन्होंने कहा कि जहां तक मृत्यु दर का संबंध है, कोरोना इतना ज्यादा खतरनाक नहीं है। मरीजों को यह पता होना चाहिए कि अगर वे बीमार होते हैं तो उनके लिए अस्पताल हैं, जहां से वे निरोग होकर वापस लौट सकते हैं।