कांग्रेस में सब दे रहे हैं इस्तीफा, मगर कोई “एक” है जो इस्तीफे की बात तक नही कर रहा

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कांग्रेस में सब इस्तीफा दे रहे हैं, सिवाए “एक” के। राहुल गांधी दे चुके हैं। पंजाब, महाराष्ट्र, झारखंड, असम, यूपी के प्रभारी और अध्यक्ष दे चुके हैं। मिलिंद देवड़ा ने भी दे दिया। और तो और कांग्रेस में यूपी पश्चिम के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी दे दिया। मगर फिर भी कोई “एक” है जो इस्तीफा देना छोड़िए, इस्तीफे की बात तक नही कर रहा है।

इस “एक” के पास भी बेहद हाईप्रोफाइल क्षेत्र का जिम्मा था, जहां कांग्रेस बुरी तरह हारी है। इस “एक” ने घूम घूमकर देश भर में कांग्रेस के लिए सभाएं कीं, पर कांग्रेस उन तमाम सीटों पर बुरी तरह हारी। इस “एक” ने राजनीति के सारे शर्म, संकोच तोड़ते हुए बाहुबली सजायाफ्ता अमरमणि त्रिपाठी की बेटी तनुश्री त्रिपाठी से लेकर बाहुबलियों के सरताज माने जाने वाले भालचंद्र यादव और रमाकांत यादव से आगे बढ़कर टिकट की डील की। मुख्तार अंसारी के भाई अफज़ाल अंसारी के खिलाफ गाजीपुर से कमजोर कैंडीडेट उतारा। कुख्यात डकैत ददुआ के भाई बालकुमार पटेल को टिकट दिया। यानि खांटी राजनीति का कोई दांव छोड़ा नही।

मगर सब कुछ करने कराने और बुरी तरह हराने के बाद भी ये “एक” अपने पद से चिपका हुआ है। और वो इसलिए क्योंकि भविष्य में कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी पर इस “एक” की ही नजर है। मेरी बात नोट कर लीजिए। कांग्रेस में एक दो टुटपुंजिए अध्यक्षों के बाद होने वाला असली अध्यक्ष ये “एक” ही है। कांग्रेस में सत्ता हमेशा से परिवार के ही पास थी और परिवार के ही पास रहेगी। राहुल गांधी ने अपना अध्यक्ष पद भी इस “एक” के लिए ही छोड़ा है। अभी एक दो गुत्थम-गुत्था टाइप के अध्यक्ष आएंगे। आपस में लड़ेंगे। मारकाट होगी और फिर “कांग्रेस बचाने के नाम पर” यही “एक” कांग्रेस की बागडोर संभालेगा।

क्या अब ये भी बताना पड़ेगा कि मैं प्रियंका गांधी के बारे में कलम तोड़ रहा हूं?

ये लेख वरिष्ठ टीवी पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है। ये लेखक के निजी विचार हैं।