कहानी जन्मभूमि की : तीन पीढ़ियों से सिल रहे रामलला के कपड़े, 5 अगस्त के लिए तैयार हैं दो अलग रंग की पोशाक

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अयोध्या. श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े राजनीतिक चेहरों को आप सभी पहचानते हैं। आज हम आपको रामलला से जुड़े उन चेहरों से मिलवाते हैं, जो आम लोगों के लिए अनजान चेहरे हैं। ये लोग पीढ़ियों से रामलला की सेवा करते आ रहे हैं। हालांकि, इन्हें इसका मेहनताना मिलता है, लेकिन इन लोगों ने कभी कम या ज्यादा की शिकायत नहीं की। ये लोग खुद को रामलला का सेवक ही मानते हैं।

प्रमोद वन मोहल्ला में भगवत प्रसाद टेलर की दुकान चलाते हैं। एक छोटे से कमरे में जोकि कपड़ों से भरा हुआ है, उसमें तीन सिलाई मशीन रखी हुई है। चारो तरफ से रंगबिरंगे कपड़ों से दबे हुए भगवत प्रसाद बताते हैं कि यह दुकान हमारे पिता बाबूलाल टेलर के नाम से प्रसिद्ध है।

लगभग 60 साल के भगवत प्रसाद टेलर इस समय काफी प्रसिद्ध हो चुके हैं। जब हम उनके पास पहुंचे तो एक भक्त अपनी पत्नी के साथ भगवान रामलला की ड्रेस सिलाने के लिए पहुंचे थे। उसी समय एक दरोगा जी किसी व्यक्ति के साथ रामलला की ड्रेस सिलाने के लिए पहुंचे। वह 6 अगस्त को रामलला को ड्रेस पहनाने वाले हैं।

इसलिए भगवत प्रसाद ने उन्हें पीले रंग का वस्त्र दिखाया और बताया पर्दे के साथ 2500रु और बगैर पर्दे का थोड़ा कम हो जाएगा। उन्होंने एडवांस दिया और नाम नोट कराकर चले गए। भगवत ने कहा कि मैं आपके साथ भगवान दर्शन को खुद चलूंगा। जहां रामलला आपकी ड्रेस पहनेंगे। जब भगवत प्रसाद हमसे मुखातिब हुए तो उन्होंने बताया हम तीन पीढ़ियों से रामलला की ड्रेस सिल रहे हैं।

इस समय डिमांड इतनी बढ़ गयी है कि सांस लेने की फुरसत नहीं है। उन्होंने 5 अगस्त को पहनाई जाने वाली रामलला की ड्रेस भी दिखाई। उन्होंने बताया कि 5 अगस्त के लिए रामादल ट्रस्ट के कल्कि राम महाराज की तरफ से ड्रेस बनाई जा रही है। यह हरे रंग की होगी और नवरत्न जड़ित होगी। उन्होंने बताया कि राम जन्मभूमि पर रामलला, लक्ष्मण, भारत और शत्रुघ्न के साथ साथ बालरूप में और बड़े रूप में हनुमान जी भी हैं।

इसलिए भगवान के लिए हरे रंग का एक पर्दा जो कि पीछे लगेगा। जबकि एक बड़ा बिछौना, फिर 5 छोटे बिछौने और फिर 5 ड्रेस और 6 दुपट्टे बनाए गए हैं। भगवत प्रसाद ने ड्रेस का दाम बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि सब राम की कृपा है।

उन्होंने यह भी बताया कि ट्रस्ट बनने से पहले सरकार साल में 7 ड्रेस भगवान के लिए बनवाती थी जोकि सोमवार के दिन सफेद, मंगलवार को लाल, बुधवार को हरा, गुरुवार को पीला, शुक्रवार को क्रीम, शनिवार को नीला और रविवार को गुलाबी होता था। जब से रामजी टाट से ठाट में आए हैं तब से भक्त भी ड्रेस भी देने लगे हैं। भगवत प्रसाद ने बातचीत में बताया कि हम प्रभु के लिए केसरिया रंग का ड्रेस भी बना रहे हैं।

ऐसा क्यों के सवाल पर वह कहते हैं कि यदि किसी को हरे रंग की ड्रेस न समझ आई तो केसरिया रंग का ड्रेस भी पहनाया जा सकता है। हालांकि उन्होंने कहा इसे बस सावधानी के लिए बनाया गया है। जबकि दिन बुधवार के हिसाब से भगवान को हरे रंग का ही ड्रेस पहनाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि हमारे पिता जी ने यह काम किया और हमारे साथ- साथ अब हमारे लड़के भी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हमारा भाई शंकरलाल भी इसी दुकान में बैठता है। उन्होंने कहा कि हमने अभी तक रामलला की सेवा की है उम्मीद है कि अब हमारे बेटे सेवा करेंगे। बेटों को कुछ और कराने के सवाल पर भगवत प्रसाद कहते हैं कि रामलला की सेवा से बेहतर क्या है। उन्हीं की कृपा रही आगे भी बढ़िया होगी।