धर्म

इस साल दो दिन है शरद पूर्णिमा, लक्ष्मीजी की पूजा का सबसे अच्छा मुहूर्त जानें

जयपुर. आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा का बहुत महत्व है। इसे शरद पूर्णिमा या आश्विन पूर्णिमा के अलावा कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। लक्ष्मीजी की पूजा के लिए यह श्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात अमृतवर्षा होती है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई के अनुसार पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा की पूजा का विधान है। इससे मानसिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है। शरद पूर्णिमा पर खासतौर पर चावल की खीर बनाकर रात में खुले आसमान के नीचे रखी जाती है। रात भर चंद्र किरणें इस पर बरसती हैं. दूसरे दिन इसे प्रसाद के रूप में खाया जाता है।

बंगाली समुदाय में शरद पूर्णिमा का खासा महत्व है. इस दिन मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित कर उनकी पूजा की जाती है। बंगाल में इसे कोजागरी पूर्णिमा का नाम दिया गया है। माना गया है कि इस दिन रात में माता लक्ष्मी धरती पर आकर आवाज लगाती हैं— कौन जाग रहा है! जागनेवालों के घर में लक्ष्मीजी का निवास बन जाता है।

इस बार आश्विन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि दो दिन है. 30 अक्टूबर और 31 अक्टूबर को पूर्णिमा तिथि है पर शरद पूर्णिमा की पूजा और परंपरा 30 अक्टूबर को ही निभाई जाएगी।

शरद पूर्णिमा तिथि
शरद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ : 30 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 45 मिनट तक
शरद पूर्णिमा तिथि समाप्त: 31 अक्टूबर को रात 08 बजकर 18 मिनट तक

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