अरब सागर से आ रहा निसर्ग, जानिए कितना खतरनाक है ये चक्रवात ?

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मुंबई
मुंबई अपने इतिहास के पहले बड़े चक्रवात की जद में आने वाला है। अरब सागर में उठ रहा चक्रवात निसर्ग बुधवार को मुंबई से उत्तर की ओर 110 किमी दूरी पर टकराएगा। इसका सबसे ज्यादा असर महाराष्ट्र और गुजरात पर पड़ने वाला है। तूफान की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने ट्वीट कर बताया कि उन्होंने देश के पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में तूफान को लेकर बने हालात के बारे में जानकारी ली है। प्रधानमंत्री ने सभी लोगों की सलामती के लिए दुआ की है और लोगों से हर मुमकिन एहतियात और सुरक्षा के कदम उठाने की अपील की है।

मौसम विभाग ने रविवार को ऑरेंज अलर्ट जारी किया था लेकिन चक्रवात की तीव्रता को आंकते हुए सोमवार को इसे रेड अलर्ट में अपग्रेड कर दिया गया। दो हफ्तों में ही देश में दूसरा चक्रवात दस्तक देने को तैयार है। इससे पहले बंगाल की खाड़ी में उठे तूफान अम्फान में पश्चिम बंगाल में तबाही मचाई थी।

कितना खतरनाक है निसर्ग? 

अम्फान से कम शक्तिशाली है निसर्ग
चक्रवात कितना शक्तिशाली है यह हवाओं की गति से मापा जाता है। निसर्ग तूफान में हवा की गति 95 से 105 किमी प्रति घंटा हो सकती है। जबकि अम्फान को सुपर साइक्लोन कैटिगरी में नंबर 5 पर रखा गया था हालांकि बाद में यह कमजोर होकर एक पायदान पीछे हो गया था लेकिन फिर भी यह बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान था। इसमें हवाओं की गति 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बह रही थी।

पिछले साल अरब सागर में 5 चक्रवात बने थे
मौसम विभाग के अनुसार, पिछले साल अरब सागर में निरंतर साइक्लोन ऐक्टिविटी देखी गई थी। ऐसा 100 साल से भी ज्यादा समय में पहली बार हुआ था। पिछले साल अरब सागर से 5 चक्रवात उठे रहे थे- वायु, हिक्का, क्यार, महा और पवन। जबकि साधारण तौर पर साल में एक या दो चक्रवात ही बनते हैं।

अगर तूफान में बदला तो कितना होगा असर?
अगर निसर्ग चक्रवाती तूफान में बदलता है तो महाराष्ट्र के कुछ तटीय इलाकों में अनुमान के हिसाब से सीधे असर पड़ेगा। हालांकि अभी चक्रवात के टकराने की सही लोकेशन का पता नहीं लग सकता है फिर भी यह मुंबई के नजदीक, पड़ोसी क्षेत्र ठाणे, रायगढ़, रत्नागिरि और सिंधुदुर्ग में टकरा सकता है। इसी के साथ 4 जून को कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है।

दक्षिण मानसून केरल में पहले से ही दस्तक दे चुका है। पश्चिमी तट के समानांतर एक डिप्रेशन बन रहा है जो समुद्र के किनारे उत्तर की ओर तीव्र और गतिमान है। इस स्थिति में अरब सागर के पूर्व मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों में मौसम की स्थिति पहले से ही खराब है जो साइक्लोन से और बिगड़ सकती है।

क्या समय से पहले आएगा मुंबई में मानसून?
दक्षिणपश्चिम मानसून के चलते महाराष्ट्र में अगले दो दिन तक बारिश की संभावना नहीं है। दक्षिणपश्चिम मानसून के केरल से उत्तर की ओर बढ़ना अभी शुरू नहीं हुआ है। साधारण तौर महाराष्ट्र में मानसून 10 जून के बाद आता है।

1891 के बाद महाराष्ट्र में पहला ऐसा तूफान
मौसम विभाग के साइक्लोन ई-ऐटलस के मुताबिक, 1891 के बाद पहली बार अरब सागर में महाराष्ट्र के तटीय इलाके के आसपास समुद्री तूफान की स्थिति बन रही है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इससे पहले 1948 और 1980 में दो बार उत्तर हिंस महासागर में इस तरह का दवाब बना था लेकिन बाद में जून के महीने में तूफान आने की स्थिति टल गई थी। यानी एक सदी से भी अधिक समय में ऐसा पहली बार होगा जब अरब सागर में विकसित होने के बाद कोई तूफान महाराष्ट्र से टकराएगा।

अरब सागर से उठने वाला तूफान गुजरात की तरफ मुड़ता है

औसतन, अरब सागर में साल में एक या दो चक्रवात उठते हैं। चक्रवात उठने के बाद वे पश्चिम ओमान और अदन की खाड़ी या फिर उत्तर में स्थित गुजरात की तरफ मुड़ जाता है। जैसा कि 1998 चक्रवात के आने के दौरान हुआ था जिसमें हजार लोग मारे गए थे या फिर पिछले साल चक्रवात वायु के कारण जो तबाही मची थी।

10 टीमों को तैनात किया गया
निसर्ग बुधवार शाम को पालघर के तटीय इलाकों से टकराने की आशंका है। इसके मद्देनजर 16 में से 10 राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बलों को तटीय जिले में तैनात किया गया है जिसमें से तीन मुंबई, दो-दो पालघर और दहानू में हैं। 6 टीमों को स्टैंडबाय में रखा गया है जिन्हें जरूरत पड़ने पर बुलाया जाएगा।